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रायपुर/छत्तीसगढ़ में सरकार के ढाई साल लगभग पूरे हो चुके है इन ढाई सालों में सरकार की या मंत्री मंडल की रिपोर्ट कार्ड अगर देखे तो कई मंत्री महोदय विवादों से घिरे नजर आए कोई अपने निष्क्रियता के कारण तो कोई अपनी अति सक्रियता के कारण मगर सक्रियता पर भी मंत्री जी के अपने ही अधिकारी ने उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया वाक्या लगभग साल भर पुराना है मगर एक बार फिर तुल पकड़ने लगा है माननीय मंत्री जी के पूर्व विशेष सहायक साहब के कारनामे मंत्री जी को दो धारी तलवार पर खड़े कर दिया है सरकार को राजस्व दिलाने की अहम जिम्मेदारी को भूल खुद के राजस्व की फिक्र ने विशेष सहायक साहब को मंत्री जी से दूर कर दिया मगर आज भी उनके ठगी के शिकार अधिकारी बड़ी उम्मीद से सरकार पर आस लगाए बैठे है कि उनकी मेहनत की कमाई जो पूर्व विशेष सहायक साहब ने मनचाहे ट्रांसफर के नाम से लिए है वो उन्हें वापस मिल जाए या फिर उनका काम हो जाए मगर सरकार की बदनामी का भय किसी अधिकारी को सामने आने की इजाजत नहीं दे रहा है चाहे वो कलेक्टर हो एसडीएम या तहसीलदार सभी अपनी इस गलती पर आज भी पछता रहे है मगर इन सब से करोड़ो रुपए इकट्ठा कर अपनी तिजोरी भरने वाले पूर्व विशेष सहायक साहब इनका फोन तक नहीं उठा रहे है ऐसे में अब ये बात दिल्ली हाई कमान तक तो पहुंचना लाजमी था जो पहुंच चुका है मगर अब सवाल यह उठता है कि केंद्र में बैठे नेताओं का प्रकोप किसपर गिरेगा इसका खामियाजा कौन भरेगा मंत्री जी या पूर्व विशेष सहायक साहब।
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